कवि ::
उसका दिल देह में कहाँ होता है
देखती हूँ उसे
कभी रात के सन्नाटे में
बिना मिजराब बजा रहा होता है
न जाने कौनसी दुनिया का सितार
कि बहने लगता है अँधियारा
और जब गुज़र जाता है पास से कोई दुःख का
गहरा बादल
तो चाँद को ढांपता एक न दीखने वाला इन्द्रधनुष छिटक जाता है
चांदनी के पास .
वह अरब की रेत में अपनी राख से
ढूंढ़ता है इंसानियत की गंध
किसी काली औरत के जिस्म में रहता है
काली पीढ़ी बनकर
तब उसका रंग कुछ और लाल होता है तंज़ानिया के गहरे गुलाब की तरह
और उसकी खुशबू से
डर जाती है सभ्यताएँ .
देखती हूँ उसे
कि किसी सितारे से ले आता है मोरचंग , मृदंग , पखवाज
या समय की भूली एक बहुत पुरानी बीन
जिस पर टंकी होती हैं भारत की इबारत
छिपाते हुए अपने ज़ख्म
वह बैजू बावरे सा भटकता है
दिल के हाथों में लिए ध्रुपद ग्वालियर की गलियों में
वह कहीं भी हो सकता है ,कहीं भी
जादुई उत्तरी रोशनी के बीच से गुज़रता
अफ्रीका की घास को सहलाता
बांधता है प्रेम की साफ़-साफ़ पट्टियाँ
किसी भी भाषा में उसका होना
रिसता हुआ दिल है
जो रहता है अपनी देह के बाहर
कवि होकर .

किसी भी भाषा में उसका होना रिसता हुआ दिल है.....बस यही है जो भी कुछ है....वाह..
प्रत्युत्तर देंहटाएंकवि का परिचय बस यही है, सुन्दर कविता...
प्रत्युत्तर देंहटाएंउसे कौन बाँध पाया है सीमाओं में???
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर रचना...
बधाई.
इधर आपकी कविताएँ शिल्प को लेकर सचेत हुई हैं.शब्दों से परे भी अब इनकी व्यंजनाएँ हैं. बहुअर्थी.
प्रत्युत्तर देंहटाएंकवि के इस नए रूप का स्वागत. कवि के रिसते दुःख से यह कविता भींगी है और इसका अहसास भी करा देती है. बधाई
वाह...
प्रत्युत्तर देंहटाएंकवि को परिभाषित करती कविता को लिखने वाले कवि हृदय को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!
very nice writing..
प्रत्युत्तर देंहटाएंकल 20/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
प्रत्युत्तर देंहटाएंधन्यवाद!
आखिरी पंक्तियों मे सब कह दिया और यही तो शायद सत्य है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह! सच्चा परिचय... सुन्दर अभिव्यक्ति...
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत बढ़िया प्रस्तुति
प्रत्युत्तर देंहटाएं--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी लगा रहा हूँ! सूचनार्थ!
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महाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ स्वीकार करें।
कवी...
प्रत्युत्तर देंहटाएंन जाने क्या देखता है न जाने क्या खोजता है
अनोखी परिभाषा
प्रत्युत्तर देंहटाएंकवि का सुंदर परिचय
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह अपर्णा जी कवि का वास्तविक परिचय हो गया. सुंदर प्रस्तुति.
प्रत्युत्तर देंहटाएंमहाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ.
जहाँ न पहुंचे रवि , वहां पहुंचे कवि ! सुन्दर
प्रत्युत्तर देंहटाएंकवि की अनोखी पहचान के लिये आभार!
प्रत्युत्तर देंहटाएंविश्वव्यापी तमाम भाषाओं से निकल कर एक कवि का इतना सुन्दर परिचय .. वाह अपर्णा दीदी - अति सुन्दर
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच
प्रत्युत्तर देंहटाएंपर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......
सुन्दरम मनोहरं .
प्रत्युत्तर देंहटाएंखूबसूरत प्रस्तुती .......
प्रत्युत्तर देंहटाएंkavi ka sundar parichay deti sundar rachna...
प्रत्युत्तर देंहटाएंएक खूबसूरत अभिव्यक्ति.. दिल से दिल तक
प्रत्युत्तर देंहटाएंअभिव्यक्ति की ऐसी उद्दात्त निर्मिति बहुत कम देखने को मिलती है। अनन्य बधाईयां।
प्रत्युत्तर देंहटाएं------
..की-बोर्ड वाली औरतें।