शनिवार, 18 फरवरी 2012

कवि ::


कवि ::

उसका दिल देह में कहाँ होता है

देखती हूँ उसे

कभी रात के सन्नाटे में
बिना मिजराब बजा रहा होता है
न जाने कौनसी दुनिया का सितार
कि बहने लगता है अँधियारा
और जब गुज़र जाता है पास से कोई दुःख का
गहरा बादल

तो चाँद को ढांपता एक न दीखने वाला इन्द्रधनुष छिटक जाता है

चांदनी के पास .

वह अरब की रेत में अपनी राख से

ढूंढ़ता है इंसानियत की गंध
किसी काली औरत के जिस्म में रहता  है
 काली पीढ़ी बनकर
तब उसका रंग कुछ और लाल होता है तंज़ानिया के गहरे गुलाब की तरह
और उसकी खुशबू से
डर जाती है सभ्यताएँ .

देखती हूँ उसे

कि किसी सितारे से ले आता है मोरचंग , मृदंग , पखवाज
या समय की भूली एक बहुत पुरानी बीन
जिस पर टंकी होती हैं भारत की इबारत
छिपाते हुए अपने ज़ख्म
 वह बैजू बावरे सा भटकता है
दिल के हाथों में लिए ध्रुपद ग्वालियर की गलियों में

वह कहीं भी हो सकता है ,कहीं भी

 जादुई उत्तरी रोशनी के बीच से गुज़रता
अफ्रीका की घास को सहलाता
बांधता है प्रेम की साफ़-साफ़ पट्टियाँ

किसी भी भाषा में उसका होना

रिसता हुआ दिल है
जो रहता है अपनी देह के बाहर
कवि होकर .


23 comments:

  1. किसी भी भाषा में उसका होना रिसता हुआ दिल है.....बस यही है जो भी कुछ है....वाह..

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  2. कवि का परिचय बस यही है, सुन्दर कविता...

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  3. उसे कौन बाँध पाया है सीमाओं में???

    सुन्दर रचना...
    बधाई.

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  4. इधर आपकी कविताएँ शिल्प को लेकर सचेत हुई हैं.शब्दों से परे भी अब इनकी व्यंजनाएँ हैं. बहुअर्थी.
    कवि के इस नए रूप का स्वागत. कवि के रिसते दुःख से यह कविता भींगी है और इसका अहसास भी करा देती है. बधाई

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  5. वाह...
    कवि को परिभाषित करती कविता को लिखने वाले कवि हृदय को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!

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  6. कल 20/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. आखिरी पंक्तियों मे सब कह दिया और यही तो शायद सत्य है।

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  8. वाह! सच्चा परिचय... सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  9. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी लगा रहा हूँ! सूचनार्थ!
    --
    महाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ स्वीकार करें।

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  10. कवी...
    न जाने क्या देखता है न जाने क्या खोजता है

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  11. वाह अपर्णा जी कवि का वास्तविक परिचय हो गया. सुंदर प्रस्तुति.

    महाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ.

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  12. जहाँ न पहुंचे रवि , वहां पहुंचे कवि ! सुन्दर

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  13. कवि की अनोखी पहचान के लिये आभार!

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  14. विश्वव्यापी तमाम भाषाओं से निकल कर एक कवि का इतना सुन्दर परिचय .. वाह अपर्णा दीदी - अति सुन्दर

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  15. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच
    पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  16. एक खूबसूरत अभिव्यक्ति.. दिल से दिल तक

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  17. अभिव्‍यक्ति की ऐसी उद्दात्‍त निर्मिति बहुत कम देखने को मिलती है। अनन्‍य बधाईयां।

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    ..की-बोर्ड वाली औरतें।

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